
पंचांग · वापि
वापि पंचांग रविवार, 4 ऑक्टोबर, 2026
विक्रम संवत 2083 · सिद्धार्थी
आश्विन कृष्ण नवमी · शरद् ऋतू · सौर मास आश्विन, दिवस 18.
नवमी · पुनर्वसु
वापि · सूर्योदय 06:30 · सूर्यास्त 18:24
चौघडिया
उद्वेग
अशुभ
सूर्योदय 06:30 पासून
राहु काळ
16:55
18:24 पर्यंत
अभिजित्
12:03
12:51 पर्यंत
नक्षत्र संपते
00:14
पुनर्वसु → पुष्य
यमगण्ड
12:27
13:56 पर्यंत
हा दिवस, एका नजरेत
| योग बदलून शिव | 12:32 |
| करण बदलून गर | 16:52 |
| नक्षत्र बदलून पुष्य | 00:14 |
| तिथि बदलून दशमी | 03:54 |
| राहु काळ | 16:55 → 18:24 |
चांद्र मास आश्विन (पौर्णिमान्त), सौर मास आश्विन, सूर्य कन्या मध्ये. दक्षिणायन.
01
पाच अंगे
सूर्योदयाला काय होते, ते कधी बदलले, आणि त्यानंतर काय आले.
| अंग | सूर्योदयाला | बदलते | नंतर |
|---|---|---|---|
| तिथि | कृष्ण नवमी | 03:54 | दशमी |
| नक्षत्र | पुनर्वसु · पाद 1 | 00:14 | पुष्य |
| योग | परिघ | 12:32 | शिव |
| करण | तैतिल | 16:52 | गर |
| वार | रविवार | सोम 06:30 | सोमवार |
02
सूर्य आणि चंद्र
सूर्योदय
06:30
वापि
सूर्यास्त
18:24
दिनमान 11 ता 54 मि
चंद्रोदय
01:12
क्षीण होणारा चंद्र
चंद्रास्त
14:00
चंद्र पुनर्वसु मध्ये
03
चौघडिया
दिवसाचे आठ आणि रात्रीचे आठ भाग — सूर्योदय ते सूर्यास्त, आणि सूर्यास्त ते पुढचा सूर्योदय या वेळेचा आठवा हिस्सा.
दिवस
06:30 → 18:24| चौघडिया | अर्थ | वेळ | फल |
|---|---|---|---|
| उद्वेग | चिंता | 06:30–07:59 | टाळा |
| चर | गती | 07:59–09:29 | सामान्य |
| लाभ | लाभ | 09:29–10:58 | शुभ |
| अमृत | अमृत | 10:58–12:27 | शुभ |
| काल | हानी | 12:27–13:56 | टाळा |
| शुभ | शुभ | 13:56–15:25 | शुभ |
| रोग | रोग | 15:25–16:55 | टाळा |
| उद्वेग | चिंता | 16:55–18:24 | टाळा |
रात्र
18:24 → 06:30| चौघडिया | अर्थ | वेळ | फल |
|---|---|---|---|
| शुभ | शुभ | 18:24–19:55 | शुभ |
| अमृत | अमृत | 19:55–21:26 | शुभ |
| चर | गती | 21:26–22:56 | सामान्य |
| रोग | रोग | 22:56–00:27 | टाळा |
| काल | हानी | 00:27–01:58 | टाळा |
| लाभ | लाभ | 01:58–03:29 | शुभ |
| उद्वेग | चिंता | 03:29–05:00 | टाळा |
| शुभ | शुभ | 05:00–06:30 | शुभ |
04
काल वेळा
राहु काळ
16:55–18:24
नवीन काम करू नका
यमगण्ड
12:27–13:56
नवीन काम करू नका
गुलिक काळ
15:25–16:55
नवीन काम करू नका
अभिजित्
12:03–12:51
शुभ
05
संपूर्ण दिवस
तिथि
वार
नक्षत्र
योग
करण
06:3009:3012:3015:3018:3021:3000:3003:3006:30
प्रादेशिक पंजी
सौर मास आश्विन चा 18वा दिवस. ओडिशा, तमिळनाडू, केरळ आणि बंगालची गणना एकत्र पाहा.
येणारे सण
वापि येथील या महिन्याचे सण, तिथल्या सूर्योदयावरून ठरलेले.
काही नियोजन करा
एखाद्या संस्कारासाठी शुभ वेळ शोधा, वगळलेल्या प्रत्येक तारखेच्या कारणासह.
वापि, Gujarat येथील वेळा (Asia/Kolkata). गणना कशी होते.